कान्हा मेरे
तेरी भक्ति हर साँस मैं करूँ
भूलूं न तुझको मैं कभी
तेरे पास ही रहूं ।
कान्हा मेरे ।
कान्हा तेरा नाम ही
जीवन का है आधार
जिसके बिना लगता मुझे
फिका सा ये संसार ।
ये मौका भी तो तुमने दिया
लिखूं तुम्हारे गीत,
कृपा से तेरी बन गया
जीवन मधुर संगीत ।
कान्हा मेरे
तेरे प्रेम की सदा आस मैं करूँ
भूलूं न तुझको मैं कभी
तेरे पास ही रहूं ।
कान्हा मेरे ।
हृदय में स्मरण रहे तेरा
लूं जब मैं आखिरी सांस ।
ये वादा भी तो तुम्ही ने किया,
थामोगे फिर तुम हाथ ।
जीवन मरण के चक्र से
छूट जाऊ अबकि बार,
कान्हा मेरी नैया को
लगा भी दो अब पार।
कान्हा मेरे
तेरी कृपा पर विश्वास मैं करूँ
भूलूं न तुझको मैं कभी
तेरे पास ही रहूं ।
कान्हा मेरे ।
- नेहा की कलम से...


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