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16 Jul 2026

मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है

  यह ब्लॉग पूरी तरह आध्यात्मिक विषयों पर आधारित है।  भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह ब्लाॅग उनके प्रति इस सेवक के प्रेम और श्रद्धा  भाव अर्पित करने का एक छोटा सा प्रयास है। यहा मेरे हृदय से निकली वह प्रार्थनाऐ है जो श्रीकृष्ण से कभी मार्गदर्शन करने का निवेदन करती है तो कभी भगवान का  अपनी कृपादृष्टि बनाए रखने के लिए धन्यवाद प्रकट करती है । यहां आपको पढने मिलेंगी मेरी लिखी कविताए,  लेख आदि। साथ ही साथ spiritual quotes भगवद् गीता , श्रीमद्भागवत आदि ग्रन्थों से।  यहां अपनी  favourite spiritual books के बारे में भी समय समय पर जानकारी देती रहूंगी। ताकि हम सब उन पुस्तकों को पढ़कर अपने जीवन में सही मायने में प्रगति कर सके।  इस ब्लॉग का नाम मैने कान्हा मेरे रखा है जोकि मेरी एक कविता का शीर्षक भी है। नेहा की कलम से.... के बाद कई वर्षो के अंतराल पर फिर से ब्लॉगिंग शुरु की है आशा है कि आप सभी मेरे इस ब्लॉग को भी पसंद करेंगे। आप सभी के आशीर्वाद से अपने भक्ति जीवन में आगे बढूं तथा आगे भी श्रीकृष्ण की प्रसन्नता के लिए कर्म करती रहूं ऐसी कामना है।

धन्यवाद 

26 Jan 2026

यद्यदाचरति श्रेष्ठ:





आज भारत अपना 77 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। आज ही के दिन 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ। संविधान एक देश को सुचारु रूप से चलाने में सबसे महत्वपूर्ण भुमिका निभाता है। यह हमें हमारे अधिकार तो दिलाता ही है, साथ ही साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने के निर्देश भी देता है। हमारे राष्ट्रगीत वन्देमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने का भी देशव्यापी उत्सव मनाया जा रहा है। सभी को बहुत बधाई। यह वही पंक्तियां है जिन्होने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में देशवासियों को देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा दिया। 

हम गणतंत्र दिवस के उत्सव में अपनी महान संस्कृति की मन मोह लेने वाली झांकियां देखते है। हमारे देश की सेनाओं के अदम्य शौर्य के बारे में जानकर जोश और गर्व से भर जाते है। शिक्षा,उद्योग और अर्थव्यवस्था में जुडते नये आयामों तथा देश की बढती आत्मनिर्भरता को देखकर हमारा मन गद् गद् हो जाता है। और इन सबमें झलकने वाली आपसी सहभागिता हमारे देश की अनेकता में एकता की मिसाल प्रस्तुत करती है। हमें ऐसे ही सदा मिलजुल कर रहना चाहिए, एक दुसरे को अच्छी बातों में बढ़ावा देना चाहिए। 

भारत अपनी महान सांस्कृतिक विरासत, अपनी आध्यात्मिकता और अपने ज्ञान के लिए पुरे विश्व में जाना जाता है। यह एक बहुत बडा कारण है जिसके आधार पर इसे विश्व गुरु का दर्जा दिया जाता है। हम सभी भारतीयों को चाहिए कि हम एक दुसरे की भावनाओं का, एक दूसरे की मान्यताओ का सम्मान तो करे ही साथ ही साथ अपने देश की मूल पहचान इसकी महान सभ्यता और संस्कृति की भी सदा रक्षा करें। यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इसके लिए सभी को मेरा तेरा से ऊपर उठना होगा। जब देश से प्रेम करने वाले लोग एक दूसरे के लिए खडे रहेंगे तो भारत के सभी लोग एक परिवार बनेंगे तब कोई भी हमारे देश को तोड़ने की हिम्मत नही कर पाएगा। इस तरह हम पुरे विश्व के लिए मिसाल बन सकते है।

गणतंत्र का अर्थ है जहां लोगो को अपनी सरकार चुनने का अधिकार हो, जहां संविधान का पालन हो। और एक आदर्श सरकार वही है जो सही मायने में सबको साथ लेकर चलती हो। जिसका नेतृत्व ऐसे नेताओं के हाथ में हो जो न केवल अपने नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान दे बल्कि उनके आत्मिक विकास की ओर भी ध्यान दे। जिससे उनमें आत्मविश्वास आए और वे देश के अच्छे व संस्कारवान नागरिक बने, नशा आदि बुराईयों से बचे । इस प्रकार हमारी भारत माता का नाम पूरे विश्व में रोशन हो।

इस पुण्य भूमि भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में हमारे प्रतिनिधियों को उस आदर्श पर चलना चाहिए जिसकी सीख स्वयं भगवान श्रीकृष्ण हमें देते है -
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ।। ।।
                                श्रीमद्भगवद्गीता 3.21

"महापुरुष जो जो आचरण करता है, सामान्य व्यक्ति उसी का अनुसरण करते हैं। वह अपने अनुसरणीय कार्यो से जो आदर्श प्रस्तुत करता है, सम्पूर्ण विश्व उसका अनुसरण करता है।"


77 वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए 




23 Jan 2026

वसन्त का आगमन



वसन्त पंचमी माता सरस्वती का प्राकट्य दिवस है और इस दिन विषेशकर सरस्वती पूजन का बहुत महत्व है। आज के दिन से माँ सरस्वती का आशीर्वाद लेकर विद्या आरम्भ करना शुभ माना जाता है। आज ही से वसन्त ऋतु का आगमन हो जाता है । यह सुन्दर ऋतु हमे भगवान श्रीकृष्ण के ऐश्वर्य की अनुभूति कराती है । भगवान श्री कृष्ण भगवद्गीता अध्याय 10 के श्लोक 35 में कहते है कि -

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ।। ।।
                       श्रीमद्भगवद्गीता 10.35

"मैं सामवेद के गीतों में बृहत्साम हूँ और छन्दों में गायत्री हूँ। समस्त महिनों में मै मार्गशीर्ष तथा समस्त ऋतुओं में फूल खिलाने वाली वसन्त ऋतु हूँ।"

हमारी यह प्रार्थना है कि माँ सरस्वती हमें ज्ञान और बुद्धि दे कि हम भगवान की दिव्य लीलाओं को यथारूप समझ सके व उनका आस्वादन कर सके । हमें बुद्धि दे कि हम भगवद् गीता और श्रीमद्भागवत जी जैसे ग्रन्थों का आश्रय लेकर भगवान से भूला हुआ अपना नित्य सम्बन्ध फिर से जोड सके और जीवन का यह उद्देश्य पूरा कर सके जिसके लिए हमे मनुष्य जीवन मिला है। 

माँ सरस्वती से हम प्रार्थना करते है कि हम अपने भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में ज्ञान के महत्व को समझे। सही गलत में अंतर कर पाए । कर्त्तव्य परायण बने साथ ही साथ अपनी प्रतिभाओं और क्षमताओं को यथासम्भव भगवान की सेवा में लगाए।
                                                   

   वसन्त पंचमी की हार्दिक शुभकामनाए 


 

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