यह ब्लॉग पूरी तरह आध्यात्मिक विषयों पर आधारित है। भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह ब्लाॅग उनके प्रति इस सेवक के प्रेम और श्रद्धा भाव अर्पित करने का एक छोटा सा प्रयास है।
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A glorious second chance
My art is lost somewhere, Oh Krishna please find it for me.
You are the only one who can help me.
Nobody but you can bring me back my might.
Nothing in three world Is hidden from your sight.
You said in the Gita that from you comes remembrance,
Knowledge and forgetfulness.
My forgetfulness must have been your plan,
I have faith dear Krishna
you will give me a glorious second chance.
You made me invest my time in studies
And made the scriptures my best buddies.
So that I can learn and speak what is truthful,
what is pleasing and what is fruitful.
Oh Krishna you are sitting within my heart
I am a surrendered soul for you will be my art.
You say you are a friend of a surrendered soul.
This life is for you, please tell me my role.
revive my art, please give me a chance
I am standing still, please make me dance.
Oh sweet lord Whose hairs are curled.
I want to tell your glories to the world
Oh dear lord whose flute enchants.
I am waiting dear Krishna for your merciful glance.
My art is lost somewhere Oh Krishna please find it for me.
You are the only one who can help me.
Neha ki kalam se…
कान्हा कान्हा कहे मेरा मन
भक्त-
कान्हा कान्हा कहे मेरा मन, कान्हा जाने कहाँ छुपा
मुरली की आवाज़ सुना दे, इतनी तो कर दे कृपा ।
कान्हा-
कान्हा कहे मैं तेरे ह्रदय में, रहता हूँ, रहूँगा सदा
तू मुझको कहाँ पर ढूंढे, तेरे पास ही तो है पता |
भक्त-
कभी गुरु में, कभी पिता में मैंने तुझको देखा है।
कभी भाई में कभी सखा में भेस बदलकर बैठा है।
कान्हा-
कभी गुरु कभी पिता कभी भाई और कभी सखा
इन सब अवतारों में, मैं तो तेरे लिए ही बना मिटा
भक्त-
मिल गया अब मुझको कान्हा, नहीं, वह तो साथ ही था
जब जब आशीर्वाद मिला था, सर पर उसका हाथ ही था।
कान्हा-
सच्चे भक्त का हाथ थामकर, मैं राह दिखलाता हूँ
धर्म हो या कर्मभूमि हो, साथ हूँ, सारथी कहलाता हूँ।
- नेहा की कलम से…
कान्हा
वो सबका सच्चा दोस्त,
हर मुश्किल से बचाता है ।
गर हाथ उसका थाम लो
वो हर क्षण साथ निभाता है ।
जन्मों जन्मों का नाता उस से,
वो मेरे मन को भाता है ।
कितनी सुन्दर छवि है उसकी,
वो मनमोहन कहलाता है ।
हर दुःख तकलीफ भुला दे और
मुख पर मुस्कान सजाता है ।
वो ही सच्चा सुखदाता है
वो तो गोविन्द कहलाता है ।
कर्त्तव्य की राह दिखाता वो
और सही गलत बतलाता है ।
शरणागत की रक्षा करता,
वो तो गिरधर कहलाता है ।
माया के जाल से बचा हमें,
आध्यात्म की राह दिखाता है ।
मुक्ति का वो दाता है,
वो तो मुकुंद कहलाता है ।
वो मालिक सारी दुनिया का,
मदद करने खुद आता है ।
वो ही तो सबका दाता है,
वो तो माधव कहलाता है ।
भक्तों का कर्ता धर्ता,
वो अद्भुत लीला करता है ।
कष्टों को हर लेता है
वो तो हरि कहलाता है ।
मुरली की तान सुनाता है
माखन और मिश्री खाता है
वृन्दावन का प्यारा लाला
वह तो कान्हा कहलाता है ।
- नेहा की कलम से…
कान्हा मेरे
कान्हा मेरे
तेरी भक्ति हर साँस मैं करूँ
भूलूं न तुझको मैं कभी
तेरे पास ही रहूं ।
कान्हा मेरे ।
कान्हा तेरा नाम ही
जीवन का है आधार
जिसके बिना लगता मुझे
फिका सा ये संसार ।
ये मौका भी तो तुमने दिया
लिखूं तुम्हारे गीत,
कृपा से तेरी बन गया
जीवन मधुर संगीत ।
कान्हा मेरे
तेरे प्रेम की सदा आस मैं करूँ
भूलूं न तुझको मैं कभी
तेरे पास ही रहूं ।
कान्हा मेरे ।
हृदय में स्मरण रहे तेरा
लूं जब मैं आखिरी सांस ।
ये वादा भी तो तुम्ही ने किया,
थामोगे फिर तुम हाथ ।
जीवन मरण के चक्र से
छूट जाऊ अबकि बार,
कान्हा मेरी नैया को
लगा भी दो अब पार।
कान्हा मेरे
तेरी कृपा पर विश्वास मैं करूँ
भूलूं न तुझको मैं कभी
तेरे पास ही रहूं ।
कान्हा मेरे ।
- नेहा की कलम से...







