वसन्त पंचमी माता सरस्वती का प्राकट्य दिवस है और इस दिन विषेशकर सरस्वती पूजन का बहुत महत्व है। आज के दिन से माँ सरस्वती का आशीर्वाद लेकर विद्या आरम्भ करना शुभ माना जाता है। आज ही से वसन्त ऋतु का आगमन हो जाता है । यह सुन्दर ऋतु हमे भगवान श्रीकृष्ण के ऐश्वर्य की अनुभूति कराती है । भगवान श्री कृष्ण भगवद्गीता अध्याय 10 के श्लोक 35 में कहते है कि -
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ।। ।।
श्रीमद्भगवद्गीता 10.35
"मैं सामवेद के गीतों में बृहत्साम हूँ और छन्दों में गायत्री हूँ। समस्त महिनों में मै मार्गशीर्ष तथा समस्त ऋतुओं में फूल खिलाने वाली वसन्त ऋतु हूँ।"
हमारी यह प्रार्थना है कि माँ सरस्वती हमें ज्ञान और बुद्धि दे कि हम भगवान की दिव्य लीलाओं को यथारूप समझ सके व उनका आस्वादन कर सके । हमें बुद्धि दे कि हम भगवद् गीता और श्रीमद्भागवत जी जैसे ग्रन्थों का आश्रय लेकर भगवान से भूला हुआ अपना नित्य सम्बन्ध फिर से जोड सके और जीवन का यह उद्देश्य पूरा कर सके जिसके लिए हमे मनुष्य जीवन मिला है।
माँ सरस्वती से हम प्रार्थना करते है कि हम अपने भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में ज्ञान के महत्व को समझे। सही गलत में अंतर कर पाए । कर्त्तव्य परायण बने साथ ही साथ अपनी प्रतिभाओं और क्षमताओं को यथासम्भव भगवान की सेवा में लगाए।
वसन्त पंचमी की हार्दिक शुभकामनाए

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