आज भारत अपना 77 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। आज ही के दिन 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ। संविधान एक देश को सुचारु रूप से चलाने में सबसे महत्वपूर्ण भुमिका निभाता है। यह हमें हमारे अधिकार तो दिलाता ही है, साथ ही साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने के निर्देश भी देता है। हमारे राष्ट्रगीत वन्देमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने का भी देशव्यापी उत्सव मनाया जा रहा है। सभी को बहुत बधाई। यह वही पंक्तियां है जिन्होने हमारे स्वतंत्रता संग्राम में देशवासियों को देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा दिया।
हम गणतंत्र दिवस के उत्सव में अपनी महान संस्कृति की मन मोह लेने वाली झांकियां देखते है। हमारे देश की सेनाओं के अदम्य शौर्य के बारे में जानकर जोश और गर्व से भर जाते है। शिक्षा,उद्योग और अर्थव्यवस्था में जुडते नये आयामों तथा देश की बढती आत्मनिर्भरता को देखकर हमारा मन गद् गद् हो जाता है। और इन सबमें झलकने वाली आपसी सहभागिता हमारे देश की अनेकता में एकता की मिसाल प्रस्तुत करती है। हमें ऐसे ही सदा मिलजुल कर रहना चाहिए, एक दुसरे को अच्छी बातों में बढ़ावा देना चाहिए।
भारत अपनी महान सांस्कृतिक विरासत, अपनी आध्यात्मिकता और अपने ज्ञान के लिए पुरे विश्व में जाना जाता है। यह एक बहुत बडा कारण है जिसके आधार पर इसे विश्व गुरु का दर्जा दिया जाता है। हम सभी भारतीयों को चाहिए कि हम एक दुसरे की भावनाओं का, एक दूसरे की मान्यताओ का सम्मान तो करे ही साथ ही साथ अपने देश की मूल पहचान इसकी महान सभ्यता और संस्कृति की भी सदा रक्षा करें। यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इसके लिए सभी को मेरा तेरा से ऊपर उठना होगा। जब देश से प्रेम करने वाले लोग एक दूसरे के लिए खडे रहेंगे तो भारत के सभी लोग एक परिवार बनेंगे तब कोई भी हमारे देश को तोड़ने की हिम्मत नही कर पाएगा। इस तरह हम पुरे विश्व के लिए मिसाल बन सकते है।
गणतंत्र का अर्थ है जहां लोगो को अपनी सरकार चुनने का अधिकार हो, जहां संविधान का पालन हो। और एक आदर्श सरकार वही है जो सही मायने में सबको साथ लेकर चलती हो। जिसका नेतृत्व ऐसे नेताओं के हाथ में हो जो न केवल अपने नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान दे बल्कि उनके आत्मिक विकास की ओर भी ध्यान दे। जिससे उनमें आत्मविश्वास आए और वे देश के अच्छे व संस्कारवान नागरिक बने, नशा आदि बुराईयों से बचे । इस प्रकार हमारी भारत माता का नाम पूरे विश्व में रोशन हो।
इस पुण्य भूमि भारत के लिए विभिन्न क्षेत्रों में हमारे प्रतिनिधियों को उस आदर्श पर चलना चाहिए जिसकी सीख स्वयं भगवान श्रीकृष्ण हमें देते है -
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ।। ।।
श्रीमद्भगवद्गीता 3.21
"महापुरुष जो जो आचरण करता है, सामान्य व्यक्ति उसी का अनुसरण करते हैं। वह अपने अनुसरणीय कार्यो से जो आदर्श प्रस्तुत करता है, सम्पूर्ण विश्व उसका अनुसरण करता है।"
77 वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए


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